धर्मात्मा कौन

1 month ago Vatan Ki Awaz 0

एक राजा के तीन पुत्र थे राज्य के वारिस उनमे से किसी एक को ही बनना था अत: एक दिन राजा ने उन्हे बुलाकर कहा”किसी धर्मात्मा को खोज लाओ।” तीनो राजकुमार किसी धर्मात्मा की खोज मे निकले कुछ समय बाद बड़ा राजकुमर एक थुलथुल आदमी को साथ लेकर लौटा। उसने राजा को बताया,”ये सेठ जी बहुत दान धर्म करते है इन्होंने अपने धन से बड़े-बड़े मंदिर बनवाए है, तालाब खुदवाएं है, प्याऊ लगवाई है और नित्यप्रति साधु- संतो को भोजन कराते हैं।“

        राजा ने सेठ का सत्कार किया और ढेरों धन देकर विदा कर दिया। सेठ ने जाते समय वचन दिया कि वह सारा धन गरीबों हेतु धर्मशाला बनवानों मे खर्च कर देगा।

      दूसरा राजकुमार अपने साथ एक गरीबों ब्राह्मण को लेकर लौटा और बोला,”इन्हें चारों वेदों,पुराणों आदि का पुरा ज्ञान है इन्होंने चार धामों की पैदल यात्रा की है ये तप भी करते है और सात- सात दिनों निर्जल व्रत रहते हैं।

     राजा ने ब्राह्मण का भी सम्मान किया और ढेरों धन देकर उन्हें विदा कर दिया। आखिर में तीसरा राजकुमार भी एक आदमी को ले आया । उसने बताया ,यह आदमी सड़क पर पड़े एक जख्मी कुत्ते के जख्मों को धो रहा था । जब मैंने इन से पुछा कि इससे आपको क्या मिलेगा तो इन्होने कहा , मुझे तो क्या मिलेगा ,हां इस कुत्ते को जरुर कुछ आराम मिल जाएगा ।

      राजा ने उस आदमी से पुछा , क्या तुम धरम-करम करते हो ?”

        तब उस आदमी ने कहा ,”मैं एक अनपढ किसान हु। धरम-करम के बारे मे मैं कुछ नही जानता । हां ,कोई जरुरत मंद दिख जाए तो य़थासंभव उसकी मदद अवश्य कर देता हुं। कोई मांगे तो अपने अनाज में से थोड़ा उसे भी दे देता हुं। कोई बिमार हो तो उसकी सेवा कर देता हुं।“

     यह सुन कर राजा ने कहा ,“कुछ पाने की आस रखे बिना दुसरो की सेवा करना ही तो धर्म है । छोटु राजकुमार ने बिल्कुल सही व्यक्ति की तलास की है । अत: राजा ने अपने तिसरे बेटे को ही अपना वारिश चुना ।