दुष्कर्म का फल

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    भरतपुर गाँव में एक वैद्ध रहता था ।औषधि लेने के लिए प्राय: लोग उसके पास आते रहते थे ।लेकिन उसकी दवा के दैरान दो –तीन लोगों की मौत हो जाने के कारण अब उससे गाँव का कोई भी व्यक्ति इलाज नहीं करवाता था । ऐसी स्थिति में वैद्ध ने असपास के गाँव के रोगियों का इलाज करना शुरु कर दिया ।लेकिन इसमें उसे बहुत मेहनत करनी पड़ती थी । कई बार कोई रोगी नहीं मिलता था ।ऐसे में वैद्ध को भूखे ही सोना पड़ता था ।

    एक दिन एक गांव में जाने के बाद भी वैद्ध को कोई रोगी नहीं मिला जिसका उपचार करके वह कुछ धन कमा पाता ।पिछले दो दिनों से वह फाका कर रहा था। घर लौटते समय वैद्ध थोड़ी गेर सुस्ताने के लिए एक वृक्ष के ऊपर कोटर में एक विषैला नाग बैठा था। उसे देखकर वैद्ध के मन में वचार आया कि अगर यह नाग किसी व्यक्ति को काच ले तो उसका इलाज करके वह कुछ धन अवश्य ही कमा सकता है। लेकिन नाग किसी व्यक्ति को कैसे काटे- यह तो अपने कोटर में बैठा है। इससे कचवाने के लिए किसी को नाग के बिल में हाथ डालने को मजबूर करना पड़ेगा।

    इस दुष्ट विचार के साथ वैद्ध ने अपने आसपास नजर दौड़ाई । तभी उसने देखा कि थोरी दूरी पर कुछ बच्चे खेल रहे है । उसने उन बच्चों को बुलाकर पेड़ के कोटर में मैना के छिपी होने की बात बताई । बच्चे मैना को पकड़ने के लालच में तुरंत कोटर के गया । उसने कोटर में हाथ डालकर कुछ पकड़ा और बाहर निकाला। उसके हाथ में नाग की गर्दन थी ।

    लेकिल जैसे ही उसने नाग को देखा,उसकी चीख निकल गई ।उसने भयभीत होकर तत्काल हाथ झटककर नाग को नीचे फेंक दिया ।नीचे बच्चों के साथ वैद्ध भी खड़ा था। नाग ठीक वैद्ध पर जा गिरा। ऐसे में क्रोधित नाग ने वैद्ध को कई जगह पर काच लिया । तीव्र विष के कारण उसकी तुरंत मृत्यु हो गई। इसलिए कहा गया है कि जो व्यक्ति दीसरों के लिए गड्ढा खोदता है,वह खुद ही उसमे गिर जाता है।