तिलक का बलिदान

1 month ago Vatan Ki Awaz 0

बाल गंगाधर तिलक महान स्वतंत्रता सेनानी और निर्भीक पत्रकार थे वे कीभ अपने कर्तव्य पथ से नही डिगे। एक बार ब्रिटश सरकार ने गाँधी जी को जेल मे बंद कर दिया था तिलक चाहते थे कि गाँधी जी जल्द से जल्द जेल से बाहर आ जाएं। इसके लिए वे अपनी कमल के जरिये निरंतर आवाज उठा रहे थे लेकिन अंज्रेजी सरकार तिलक को भी जेल मे डालने की कोशिश कर रही थी तिलक जानते थे कि यदि उन्हें जेल मे बंद किया गया तो आंदोलन शिथिल पङ जाएगा 1 वे अपने कार्यालय मे बैठकर इसी तरह की कई अनसुलक्षी गुत्थियां सुलझाने मे व्यस्त थे कि अचानक उनके घर से खबर आई कि उनका बेटा बीमार है वे जल्दी घर आ जाएं।

तिलक ने खबार देने वाले कर्मचारी को देखा फिर पहले की तरह अपने काम मे लग गए । थोड़ी देर बाद वह कर्मचारी फिर बोला,” बाबू जी ! आपका बेटा बहुत ज्यादा बीमार है आप घर चले जाइए।” तिलक बोले,” भाई! उसके लिए डाँक्टर से कह दिया है वे जाकर देख लेंगे मै वहां क्या करुंगा? किंतु  जो  काम मै कर रहा हूं उसे कोई दुसरा नही कर सकता यह तो मुझे ही करना है।”

अपना काम पुरा कारके शाम को जब तिलक जी अपने घर पहुंचे तो वहां एक कोहराम मचा हुआ था उनके बीमार बेटे का निधन हो गया था लेकिन तिलक पर इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ा। तभी किसी ने उनसे कहा,” बेटे की बीमारी की सूचना मिलने पर आपको घर आ जाना चाहिए था। अगर आप किसी अच्छे डाँक्टर कोले अपने साथ ले आते तो शायद यह बच जाता।“

तिलक ने कहा, तुम ठीक कहते हो भाई! लेकिन मैं यह कैसे भूलूं कि हमारा देश आजाद नहीं हैं। मेरे सामने एक तरफ तो देश के असंख्य बच्चों की पीड़ा है तो दूसरी तरफ एक बच्चे की बीमारी। अब तुम्हीं बताओं कि मैं उन्हें छोड़कर कैसे आ सकता था। मेरे लिए पहले मेरा देश है, बाद में अपना पुत्र।”

तिलक के इस बलिदान को राष्ट्र कभी नहीं भूल पाएगा।