ज्ञान की कीमत

5 months ago Vatan Ki Awaz 1

एक युवक विवाह के दो साल बाद परदेश जाकर व्यापार करने की इच्छा अपने पिता से जाहिर करता है । पिता ने भी इस बात की स्वीकृति दे देता है। वह अपनी गर्भवती पत्नी को माँ बाप के जिम्मे छोड़कर व्यापार करने चला जाता है । परदेश में मेहनत से बहुत धन कमाया और वह धनी सेठ बन गया । सत्रह वर्ष धन कमाने में बीत गए तो जाकर संतुष्टि हुई । इतने दिनों के बाद अब घर लौटने की इच्छा हुई । पत्नी को पत्र लिखकर आने की सूचना दिया और जहाज में बैठ गया।

उसे जहाज में एक व्यक्ति मिला जो दु:खी मन से बैठा था । सेठ ने अब उसकी उदासी का कारण पुछा तो उसने बताया कि इस देश में ज्ञान की कोई कद्र नहीं है । मैं यहाँ  ज्ञान बेचने आया था पर कोई भी लेने को तैयार नहीं है ।

सेठ ने सोचा इस देश में मैंने बहुत धन कमाया है और यह मेरी कर्म भूमि है ,इसका मान रखना चाहिए । उसने ज्ञान सूत्र खरीदने की इच्छा जताई । उस व्यक्ति ने कहा -मेरे हर ज्ञान सूत्र की कीमत 500 स्वर्ण मुद्राएं है । सेठ को सौदा तो महँगा लग रहा था, लेकिन कर्म भूमि का मान रखने के लिए 500 स्वर्ण मुद्राएं दे दी ।

व्यक्ति ने ज्ञान का पहला सूत्र दिया-कोई भी कार्य करने से पहले दो मिनट रुककर सोच लेना चाहिए । सेठ ने सूत्र को अपने डायरी में लिख लिया । कई दिनों के यात्रा के बाद अपने गाँव पहुँचा । उसने सोचा इतने दिनों बाद लौटा क्यों न चुपके से बिना बताए सीधे पत्नी के पास पहुँच कर उसे आश्चर्य उपहार दुँ । घर के द्वार पालो को मौन रहने की इशारा करके सीधे कक्ष में गया। तो वहाँ का नजारा देखकर उसके पाँवो के नीचे से जमीन खिसक गया ।

पलंग पर उसके पत्नी के साथ एक युवक सोया हुआ था। अत्यंत क्रोध में सोचने लगा कि मैं परदेश में भी इसका चिता करता रहा और ये यहाँ से अन्य पुरुष के साथ है। दोनों को जीवित नहीं छोड़ूँगा । क्रोध में तलवार निकाल लिया । वार करने ही जा रहा  था  कि उतने में ही उसे 500 स्वर्ण मुद्राओं से ज्ञान प्राप्त सूत्र याद आया – कि कोई काम करने से पहले दो मिनट सोच लेना ।

सोचने के लिए रुका तलवार पीछे खींची तो एक बर्तन से टकरा गई । बर्तन गिरा तो पत्नी की नींद खुल गई । जैसे ही उसकी नजर अपने पति पर पड़ा वह खुश हो गई । धीरे से प्यार से बोली आपके बिना जीवन कितना सुना – सुना था। इंतजार में इतने वर्ष कैसे निकाले । यह मैं ही जानती हूँ । सेठ तो पलंग पर सोए पुरुष को देखकर कुपित था ।

पत्नी उस युवक को उठाने के लिए कहा-बेटा जाग, तेरे पिता आए है । युवक उठकर जैसे ही पिता को प्रणाम करने के लिए झुका माथे की पगड़ी गिर गई । उसके लंबे बाल बिखर गए । सेठ की पत्नी ने कहा – स्वामी ये आपकी बेटी है । पिता के बिना इसके मान को कोई आँच न आए , इसलिए मैंने इसे बचपन से ही पुत्र के समान ही  पालन-पोषण और संस्कार दिया है । यह सुनकर सेठ की आँखों में अश्रु धारा बह निकली ।

पत्नी और बेटी को गले लगाकर सोचने लगा कि यदि आज मैंने उस ज्ञान सूत्र को नहीं अपनाया होता तो जल्दबाजी में कितना अनर्थ हो जाता । मेरे ही हाथों से मेरा निर्दोष परिवार खत्म हो जाता । ज्ञान का यह सूत्र उस दिन तो महँगा लग रहा था , लेकिन ऐसे सूत्र के लिए 500 मुद्राएँ तो बहुत ही कम है ।

दोस्तों ज्ञान तो अनमोल है, जो मानव को श्रेष्ठ बनाता है । ज्ञान के कारण ही मनुष्य सभी प्राणियों में श्रेष्ठ है ।

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