क्या विशेषज्ञों के सलाह से लौटेंगी घर खरीदारों मे विश्वास

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क्या सरकार, प्राधिकरण और बिल्डर्स दे पाएंगे जनता के सवालों के जबाब. क्या घर खरीदारों के मन मे विश्वास जगा पाएंगे रियल एस्टेट सेक्टर के विशेषज्ञ. ईमानदार सरकार पर उठ रहे सवाल के जवाब से खुश हो पाएंगे घर खरीदार. क्या प्राधिकरण जो की सवालों से घिरी हुई है खासकर जब से आग लगी है.

घर खरीदारों के लिए अच्छा मौका है की अपना सवाल सीधे रियल एस्टेट सेक्टर के विशेषज्ञ के सामने रख पाएंगे. लम्बे समय की इंतज़ार शायद उनको थोड़ा सा भरोसा देने कामयाब हो. नवभारत टाइम्स नवनिर्माण डिजिटल कॉन्क्लेव जो की 27 जून को आयोजित किये जा रहे है. ऐसे तो इसमें प्राधिकरण, शहरी विकास और औद्योगिक मंत्रालय से संवंधित सवाल भी पूछे जा सकते है लेकिन, नोएडा ग्रेटर नोएडा मे रह रहे घर खरीदार के लिए खास है. 3लाख से अधिक घर खरीदार जो लम्बे समय से अपने खून पसीने के गाढ़ी कमाई देने के बाद भी दर – दर की ठोकरे खा रहे है उनके लिए खास हो.

इस डिजिटल कॉन्क्लेव मे नोएडा प्राधिकरण, शहरी विकास मंत्रालय और supertech के cmd शामिल होंगे जो बड़ी बड़ी से सभी सवालों के जबाब देंगे. प्राधिकरण के सीईओ रितु माहेश्वरी, औद्योगिक विकास मंत्री सतीश महाना, सुपरटेक के cmd श्री आर के अरोड़ा जनता और जनता के प्रतिनिधि के सवालों के जबाब देंगे.

शहर मे सवाल कई है 3 लाख से ज्यादा होम buyers अपने गाढ़ी कमाई के पैसे लगाने के बाद भी अपने सपनो के घर के लिए दर दर भटक रहे है. रेरा ने अच्छे फैसले जरूर किये है लेकिन ऐसा लगता है जैसी की रेरा के फैसले को भी प्रशाशनिक और बिल्डर के पर लागू नही है. हॉल ही मे विशाल इंडिया मे छापे एक ख़बर के मुताबिक कई लोगों को समय से घर नही मिला तो रेरा आने के बाद खरीदारों ने रेरा के सामने अपील किया.

ग्राहकों ने रेरा के सामने अपील किया और रेरा ने ग्राहकों के हित मे फ़ैसला लिया. लेकिन प्रशाशनिक और बिल्डर ने आज तक उन फैसले पर कोई ध्यान नही दिया है.

समीर रैना ने सुपरटेक मे 2013 मे घर ख़रीदा जिसके लिए 2015 तक की समय दिया गया. लेकिन 2018 तक भी पोजीशन नही दिया गया. जिसके बाद समीर रैना ने रेरा के सामने अपना पक्ष रखा और रेरा ने बिल्डर को ग्राहक के पैसे वापस करने के लिए आर सी (RC) जारी कर दिया. Rc no. 2228 जो की जुलाई 2019 मे जारी किया गया था. लेकिन 1 साल होने जा रहा है ग्राहक के पैसे की वापसी नही की गयी है. अब रेरा के फैसले के बाद भी समीर रैना ऑफिस ऑफिस करने मे लगे है.

कॉन्क्लेव मे हलाकि मुख्य विषय रियल एस्टेट ही है. सरकार के तरफ से औद्योगिक विकास मंत्री, और प्राधिकरण के तरफ से सीईओ है तो जाहिर है की हल ही मे प्राधिकरण के इंडस्ट्रियल अकाउंट सेक्शन मे लगी आग और उठाये गए प्रभावी कदम पर भी सवाल पूछे जा सकते है. क्यूंकि जिस बिल्डिंग मे आग लगी और दमकल कर्मियों को आग बुझाने मे 3 घंटे लगे तो जाहिर है की बहूत सारे फ़ाइल जो इंडस्ट्री से संवंधित रहा होगा वो भी स्वाहा हो गया होगा. हलाकि प्राधिकरण ने इसके लिए जाँच की टीम गठित कर जाँच के आदेश भी दिए गए लेकिन अभी तक रिपोर्ट के लिए इंतज़ार है. सबसे बड़ा सवाल इतना बड़ा आगजनी के लिए कोई एफ आई आर भी नही कराये गए.

प्राधिकरण और बिल्डर को मिलकर कमजोर बर्गो के लिए अढ़ाई लाख मकान बनाने की लक्ष्य है, जिसके लिए बिल्डर को ग्रेटर नोएडा वेस्ट मे far भी दिए गए थे जिसके सस्ती मकान बनाकर समाज के कमजोर वर्ग को देना था. दूसरा प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत 50 हज़ार मकान बनाने की लक्ष्य जो की 2022 तक पूरा करने की लक्ष्य है. हालांकि यह मामला 2018 से ही चल रहा है, लेकिन एक बार फिर से प्राधिकरण ने कमर कस ली है और बिल्डर को जमीन आवंटन करने की तैयारी मे है.

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