केरल में रैट फीवर का कहर, अब तक 43 की मौत, रविवार को 10 जानें गईं

    0
    12

    अधिकारियों ने बताया कि लगभग 350 लोगों में रैट फीवर की शिकायत मिली है जिनका इलाज प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में किया जा रहा है.

    प्रतीकात्मक तस्वीर
    केरल में बाढ़ का कहर खत्म होने के बाद अब पानी से फैलने वाली बीमारी से लोगों की मौतें हो रही हैं. 20 अगस्त से लेकर अब तक रैट फीवर की वजह से 43 लोगों की मौत हो चुकी है. रविवार को ही 10 लोगों की मौत हो गई. पिछले तीन दिनों में इस बीमारी की वजह से 31 लोगों की मौत हो चुकी है. अधिकारियों ने बताया कि लगभग 350 लोगों में रैट फीवर की शिकायत मिली है जिनका इलाज प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में किया जा रहा है. पिछले पांच दिनों में इनमें से 15 पॉज़िटिव पाए गए हैं. रैट फीवर के अधिकतर मामले कोझीकोड और मलप्पुरम जिलों पाए गए हैं. 
    बीमारी के कहर को देखते हुए राज्य सरकार ने लोगों से अतिरिक्त सावधानी बरतने का अलर्ट जारी किया है. स्वास्थ्य मंत्री कुमारी शैलजा ने कहा कि राज्य सरकार सभी ज़रूरी और एहतियाती कदम उठा रही है और बाढ़ के पानी के संपर्क में आने वाले लोगों से अपील की है कि वह अतिरिक्त निगरानी रखें. उन्होंने कहा कि जो लोग सफाई के काम में लगे हैं उन्हें ‘डॉक्सीसाइलिन’ की खुराक ले लेनी चाहिए. हालांकि उन्होंने लोगों को खुद से दवा लेने से मना किया. उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य केंद्रों और व सरकारी अस्पतालों में ज़रूरत से ज़्यादा दवाएं मौजूद हैं.

    दरअसल लेप्टोपाइरोसिस बीमारी चूहों, कुत्तों व दूसरे स्तनधारियों में पाई जाती है जो कि आसानी से इंसानों में फैल जाती है. बाढ़ की वजह से मनुष्य एवं पशु एक स्थान पर इकट्ठे हो जाते हैं, परिमाणस्वरुप उनके बीच परस्पर क्रिया होती है जिससे बैक्टिरया के फैलने के लिए आदर्श वातावरण तैयार हो जाता है. डीएचएस के एक अधिकारी ने बताया, “समस्या यह है कि यह बीमारी बहुत आसानी से फैल जाती है. जब त्वचा या श्लेष्मा झिल्ली पानी, नम मिट्टी या कीचड़ के संपर्क में आती है तो इससे संक्रमण फैल सकता है.” अधिकारी ने कहा कि ऐसे में पहली ज़रूरत तेजी से उपचार करना है.