इंडोनेशिया का यह #शिव_मंदिर अद्भुत है।

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  • कहते है, यह सभी नाग श्रापित है, इसी कारण सिद्ध शिव स्थान के सामने प्रतिमा बने पड़े है।
  • ऐसे नाग कम्बोडिया, वियतनाम में भी है। इस पृथ्वी पर कितने रहस्य है, संभवतः एक मनुष्य अपने जीवन में जान भी नहीं पाता।

कहते हैं यदि नियति में कुछ घटना लिखित है तो उसके घटित होने हेतु सारी कायनात एक हो जाती है। विश्वास ना हो तो मेरे साथ हुए इस वाकये पर गौर कीजिये। मैं इंडोनेशिया में योग्यकर्ता की यात्रा पर थी और अगले दिन भोर बोरोबुदुर मंदिर के सूर्योदय भ्रमण की योजना बना रही थी। मैंने इसकी जानकारी ट्विटर पर दी। तत्काल मुझे नरेन्द्र रामकृष्णजी से जवाब मिला जिसमें उन्होंने मुझे प्रमबनन मंदिर परिसर के भी भ्रमण की सलाह दी। उन्होंने सलाह दी कि बोरोबुदुर से मात्र २० मिनट की दूरी पर स्थित प्रमबनन मंदिर परिसर भ्रमण के लिए २ घंटे से भी कम समय लगता है और इसे बिना देखे वापस जाना स्वयं के साथ अन्याय होगा। मैंने कुछ खोजबीन की और अपने इण्डोनेशियाई मेजबान से भी चर्चा की। एक के पीछे एक मसले सुलझते गए और अंततः अपने जन्मदिन पर मुझे दोनों मंदिरों के दर्शन उपहार स्वरुप मिल गए। सुबह के समय मैंने बोरोबुदुर के दर्शन किये और दोपहर तक मैं प्रमबनन मंदिर परिसर के समक्ष खड़ी थी। मेरे साथ ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड व इंडोनेशिया के साथी ब्लॉगर भी उपस्थित थे। प्रमबनन मंदिर परिसर के बारे में मेरे पास सीमित जानकारी थी। इसलिए सारे रास्ते मैंने किताबों से उसके बारे में और जानकारी हासिल की। वहां पहुँच कर गलती से मैंने अंतर्राष्ट्रीय यात्री के स्थान पर घरेलु यात्री का टिकट खरीद लिया था इसलिए आशंका से थोड़ी घबरायी हुई थी। बाद में मुझे पता चला कि विदेशी यात्री टिकट करीब १० गुना ज्यादा महंगा है पर उसके साथ एक कॉफ़ी भी मुफ्त मिलती है। किस्मत से मैंने एक स्वादिष्ट कॉफ़ी पहले ही पी ली थी।

प्रमबनन मंदिर परिसर की तरफ जाते वक्त जो पहला विचार आपको झकझोर देता है वह है इसकी विशालता। तीन ऊँचे मंदिरों के शिखर बाकी मंदिर परिसर से ऊपर उठ कर दिखाई पड़ते हैं। बाकी के मंदिर इनकी तुलना में बौने नजर आते हैं। जैसे आप इनके पास पहुंचते हैं, वहां कई जगह गहरे धूसर रंग के पथरी के मलबे दिखाई पड़ते हैं। यह मलबे किसी काल में खड़े मंदिरों का वर्त्तमान रूप हैं।

किवदंतियों के अनुसार प्रमबनन मंदिर परिसर में कुल ९९९ मंदिर थे। हालाँकि वास्तुविदों के अनुसार केवल २४० मंदिरों के अस्तित्व के ही प्रमाण प्राप्त हैं।

इस मंदिर का गठन श्रीयंत्र की रूपरेखा से समानता रखती है। इसके मध्य में शिव मंदिर व दोनों तरफ ब्रम्हा और विष्णु मंदिर हैं। हर मंदिर से सम्बंधित भगवान् के वाहनों के भी मंदिर हैं, अर्थात् नंदी बैल, हंस व गरुड़। ब्रम्हा और हंस के मंदिरों के मध्य व इसी तरह विष्णु और गरुड़ के मंदिरों के मध्य दो मंदिर और हैं। इन्हें अपित मंदिर कहा जाता है। मेरे इण्डोनेशियाई मित्र के अनुसार अपित का अर्थ मध्य है। यह मंदिर किसे अर्पित है इसकी जानकारी मुझे प्राप्त नहीं हुई।

इस परिसर के तीन मुख्य व विशालतम मंदिर हिन्दू धर्म के त्रिमूर्ति अर्थात् ब्रम्हा, विष्णु और शिव भगवान् को समर्पित है। मध्य में स्थित शिवमंदिर को शिवगृह या शिवालय अर्थात् भगवान् शिव का निवासस्थान कहा जाता है। शिव मंदिर, प्रमबनन का विशालतम मंदिर है। यह इस तथ्य का द्योतक है कि प्रबनन मंदिर के निर्माता शिव भक्त थे। हालांकि ब्रम्हा व विष्णु मंदिरों की उपस्थिति संकेत करती है कि ९वीं सदी के जावा में, जब इस मंदिर का निर्माण हुआ था, तीनों देवताओं की आराधना की जाती थी। शिव मंदिर के गर्भगृह तक पहुँचने के लिए खड़ी ऊंची सीड़ियाँ चढ़नी पड़ती हैं। मंदिर की बाहरी भित्ति पर शिल्पकारी की गयी है परन्तु भीतरी दीवारें सादी हैं। निश्चित रूप से यह नहीं कह सकती कि यह पहले से ही साधी थीं या मरम्मत के उपरांत यह ऐसी हो गयी है। मंदिर का गर्भगृह छोटा है और मंडप व अग्रशाला की कोई पद्धति दिखाई नहीं दी।चौकोर योनि पर रखे कमल के पुष्प के ऊपर शिव की ऊंची मूर्ति है। अर्थात् यहाँ मानवरूपी शिवलिंग स्थापित है। वस्त्र धारण किये शिव की प्रतिमा को देख मुझे भारत में गांधार रीति के बुद्ध के चित्रों की याद ताज़ा हो गयी।

शिव प्रतिमा पर अलंकृत अधोवस्त्र उनके टखने तक लम्बा है व उन्होंने पैरों में मोटी पायजेब पहनी हुई है। चार भुजाधारी शिव प्रतिमा की भुजाएं भंगित हैं, इसलिए उन्होंने हाथों में क्या पकड़ा था इसका अनुमान लगाना असंभव है। इनकी जटाएं शीष के ऊपर बंधी है और गर्दन पर एक सर्प लिपटा हुआ है।

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