अजमेर में करीब तेरह सौ से ज्यादा प्रकरणों को राष्ट्रीय लोक अदालत ने निपटाया। विधिक सेवा प्राधिकरण की सकारात्मक पहल। तलाक के कगार पर पहुंचे 6 जोड़ों का मिलन हुआ।

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    अजमेर में करीब तेरह सौ से ज्यादा प्रकरणों को राष्ट्रीय लोक अदालत ने निपटाया। विधिक सेवा प्राधिकरण की सकारात्मक पहल। तलाक के कगार पर पहुंचे 6 जोड़ों का मिलन हुआ।

    12 जनवरी को अजमेर में भी राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया गया। एक ही दिन में करीब तेरह सौ से ज्यादा प्रकरणों का निस्तारण हुआ। इसमें अजमेर जिला विधिक प्राधिकरण के सचिव और अपर जिला न्यायाधीश शक्ति सिंह शेखावत की सकारात्मक पहल रही। शेखावत ने बताया कि करीब 13 हजार प्रकरणों को चिन्हित किया गया था। इन प्रकरणों को आपसी समझौते से निपटाने के लिए अजमेर में 48 बैंचों का गठन किया गया। प्राधिकरण के अध्यक्ष एवं जिला एवं सत्र न्यायाधीश विनोद कुमार भारवानी के दिशा-निर्देंश पर दोनों पक्षों को एकसाथ बैठाकर समझौता करवाया गया। शेखावत ने कहा कि लोक अदालत में मामलों के निस्तारण में वकील समुदाय की भी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। असल में पक्षकार समझौते का निर्णय अपनी वकील की सहमति से ही करता है। अदालतों में ऐसे हजारों मामले लम्बित है, जिनमें समझौता हो सकता है। ऐसे ही मामलों को चिन्हित कर 12 जनवरी को लोक अदालत में निपटाया गया। लोक अदालतों की मंशा अदालतों में मुकदमों का भार कम करने की होती है, इससे पक्षकारों को भी राहत मिलती है। शेखावत ने कहा कि अजमेर में पक्षकारों का रूख भी सकारात्मक देखा गया है। आने वाले दिनों में भी लोक अदालतें लगाई जाएगी। उन्होंने बताया कि विधिक सेवा प्राधिकरण के माध्यम से शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में शिविर लगाकर सरकार की विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं की क्रियान्विति भी करवाई जाती है। यह देखा जाता है कि योजनाओं में पात्र व्यक्ति को लाभ मिल रहा है या नहीं। शिविरों में पात्र व्यक्ति को लाभ भी पहुंचाया जाता है। प्राधिकरण का उद्देश्य जरूरतमंदों लोगों की सेवा करना है। लोगों को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक भी किया जाता है। प्रत्येक नागरिक को यह पता होना चाहिए कि संविधान में उसे क्या-क्या अधिकार मिले हुए हैं। कई बार जानकारी के अभाव में पात्र व्यक्ति को सरकार की योजनाओं का लाभ नहीं मिल पाता है। शिविर लगाकर लोगों को अधिकारों के प्रति भी जागरूक किया जाता है। कोई भी व्यक्ति प्राधिकरण के कार्यालय में आकर जानकारी प्राप्त कर सकता है। 12 जनवरी को राष्ट्रीय लोक अदालत में निपटाए गए मामलों के लिए शेखावत ने पक्षकारों, वकील समुदाय और न्यायिक कर्मचारियों का आभार जताया। शेखावत ने कहा कि मुकदमों की फाईलों को लोक अदालत में निस्तारण तक की स्थिति में लाने में न्यायिक कर्मचारियों की भी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। शेखावत ने न्यायिक अधिकारियों का भी आभार प्रकट किया।
    छह जोड़ों का हुआ मिलन:
    12 जनवरी को राष्ट्रीय लोक अदालत की सबसे बड़ी उपलब्धि 6 जोड़ों का मिलन होना है। पारिवारिक और विभिन्न अदालतों में इन परिवारों में तलाक को लेकर मुकदमें चल रहे थे। लेकिन जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की समझाईश के बाद ऐसे विवादों को आपस में सहमति से निपटाया गया और 12 जनवरी को राष्ट्रीय लोक अदालत में 6 जोड़ों ने एक-दूसरे को माला पहनाकर साथ रहने का संकल्प लिया। अदालत से ही यह जोड़े खुशी-खुशी अपने घर गए। मुकदमा दायर करते वक्त पति-पत्नी एक-दूसरे की शक्ल देखना नहीं चाहते थे, लेकिन 12 जनवरी को दोनों गले मिलकर एक साथ घर के लिए रवाना हुए। इस अवसर पर जिला एवं सत्र न्यायाधीश विनोद कुमार भारवानी, प्राधिकरण के सचिव शक्ति सिंह शेखावत, मुख्य न्यायिक अधिकारी भारत भूषण शर्मा, पारिवारिक न्यायालय के न्यायाधीश रीटा तेजपाल आदि ने जोड़ों को शुभकामनाएं दी। प्राधिकरण के सचिव शेखावत का कहना रहा कि ऐसे …

    अखिलेश और मायावती ने यूपी में कांग्रेस को सोनिया और राहुल की सीटें दीं। अजीत सिंह जैसों के लिए दो सीट रखीं। 38-38 सीटें बांट लीं।

    भाजपा को हटाने के लिए कांग्रेस जहां महागठबंधन बनाने में जुटी है, वहीं 12 जनवरी को देश के सबसे बड़े प्रदेश यूपी की 80 सीटों का बंटवारा समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी ने एक तरफा कर लिया है। संयुक्त प्रेस कान्फेंस में बसपा प्रमुख मायावती और सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने कहा कि दोनों पार्टियां यूपी में 38-38 सीटों पर चुनाव लडें़गी। कांग्रेस के लिए रायबरेली और अमेठी की सीट छोड़ दी गई है, ताकि श्रीमती सोनिया गांधी और कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी आसानी से चुनाव जीत सकें। 2 सीटें अन्य विपक्षी दलों के लिए छोड़ी गई है। 38-38 सीटों पर बसपा और सपा के कौन-कौन उम्मीदवार होंगे, इसकी घोषणा बाद में की जाएगी। सीटों को लेकर दोनों ही दलों में कोई विवाद नहीं है। प्रेस कान्फेंस में अखिलेश और मायावती ने एक-दूसरे की जमकर तारीफ की। अखिलेश का कहना रहा कि मायावती का अपमान मेरा अपमान होगा। दोनों ने कहा कि यह गठबंधन भाजपा के घमंड को तोड़ने के लिए किया गया है। यह गठबंधन मई से होने वाले लोकसभा चुनाव तक ही सीमित नहीं रहेगा बल्कि विधानसभा और फिर 2024 के लोकसभा चुनाव से आगे भी चलेगा।
    कांग्रेस को छोड़ा:
    कांग्रेस जहां गैर भाजपाई दलों का महागठबंधन बनाने में जुटी हुई है, वहीं यूपी में मायावती और अखिलेश ने कांगे्रस को बड़ा झटका दे दिया है। 80 सीटों में से मात्र 2 सीटें कांग्रेस को देकर स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है। गत विधानसभा के चुनाव में अखिलेश यादव ने मायावती को दरकिनार कर कांग्रेस से समझौता किया था, लेकिन बुरी हार का सामना करना पड़ा। इससे पहले 2014 के लोकसभा चुनाव में भी भाजपा ने यूपी में 80 में से 72 सीटों पर जीत दर्ज की। नरेन्द्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने और भाजपा को पूर्ण बहुत मिलने में यूपी की 72 सीटों का ही बड़ा योगदान रहा। लोकसभा और विधानसभा में चुनाव में सपा और बसपा को भाजपा से ज्यादा वोट मिले, लेकिन वोटों का बंटवारा हो जाने से दोनों दलों का सूपड़ा साफ हो गया। भाजपा के मुकाबले वोटों का बंटवारा नहीं हो, इसलिए मई में होने वाले लोकसभा चुनाव से पहले सपा और बसपा ने गठबंधन कर लिया है। दोनों दलों का मानना है कि इस समझौते से ही भाजपा को हराया जा सकता है। इसी समझौते के तहत लोकसभा के तीन उप चुनावों में सपा बसपा का गठबंधन जीत गया। भाजपा के लिए अब यूपी में जीत आसान नहीं होगी।
    एस.पी.मित्तल) (12-01-15

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