न्यायिक नियुक्तियों पर कानून मंत्रालय😲 की भूमिका खानापूर्ति की 👎नहीं- रविशंकर प्रसाद

न्यायिक नियुक्तियों पर कानून मंत्रालय😲 की भूमिका खानापूर्ति की 👎नहीं- रविशंकर प्रसाद

केंद्रीय कानून मंत्री के रूप में सोमवार को कामकाज संभालने के बाद रविशंकर प्रसाद ने कहा कि न तो वह और न ही उनका मंत्रालय न्यायिक नियुक्तियों पर खानापूर्ति की भूमिका निभाएंगे और वह न्यायाधीशों की नियुक्ति की प्रक्रिया तेज करने के लिए उच्चतम न्यायालय तथा उच्च न्यायालयों के साथ परामर्श में एक पक्ष की तरह काम करेंगे।

प्रसाद ने कहा कि सरकार निचली अदालतों में न्यायाधीशों की नियुक्ति के लिए अखिल भारतीय न्यायिक सेवा गठित करने के लिए सभी पक्षों के साथ बातचीत तेज करना चाहती है। पदभार संभालने के बाद संवाददाताओं से बातचीत में प्रसाद ने कहा, ‘‘कानून मंत्री और कानून मंत्रालय एक पक्ष हैं। जाहिर तौर पर कॉलेजियम प्रणाली को उचित सम्मान दे रहे हैं।’

पीटीआई के मुताबिक, रविशंकर प्रसाद ने कहा, ‘अपना पक्ष रखेंगे और नियुक्तियों को तेज करने के लिए उच्चतम न्यायालय तथा उच्च न्यायालयों के साथ बातचीत में पक्ष बने रहेंगे।’ मोदी सरकार ने पिछले कार्यकाल में कई बार उच्चतम न्यायालय और उच्च न्यायालयों में नियुक्ति के लिए कॉलेजियम की सिफारिशों को विभिन्न कारणों का हवाला देते हुए लौटा दिया था। सरकार कहती रही है कि कानून मंत्रालय केवल खानापूर्ति की भूमिका में नहीं है, जो महज फाइलों को स्वीकार करता रहेगा।

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