एकता में बल

6 days ago vatan 0

एकता में बल

किसी शहर में एक धनी व्यापारी रहता था। उस शहर में प्राय:  चोरियां होती रहती थीं  मगर चोर पकड़ा नहीं जाता था। एक दिन उस धनी व्यापारी ने चोर को पकड़ने की एक योजना बनाई। उसने अपने बारे में यह अफवाह फैला दी कि उसे रात में कुछ भी नीं दिखाई देता। उसे रतौंधी हो गई है।

जब चोर को यह बात पता चली तो उसने उस व्यापारी के घर चोरी करने का निर्णय किया। एक रात जब चोर उस व्यापारी के घर चोरी करने पहुंचा तो उसकी आंख खुल गई। चोर एक खंभे के पीछे जाकर छिप गया।

यह देखकर व्यपारी अपनी पत्नी से बोला,” अजी सुनती हो, अभी-अभी मैंने एक सपना देखा है। सुबह होते ही कच्चे रेशम के दाम दुगने होने वाले हैं। अपने घर में ढ़ेर सारा रेशम है। अगर मुझे रतौंधी नहीं होती तो सारा धागा इसी वक्त नापकर देखता कि हमें किताना लाभ होगा?”

व्यापारी की पत्नी बोली,”स्वामी! आपकी बात ठीक है। मगर अभी रहने दें, सुबह यह सब देख लेना।“

व्यापारी ने कहा,” इसमें कुछ करना नहीं है। बस खंभे के चारों तरफ लपेटकर अनुमान लगा लूंगा कि हमारे पास कितना कच्चा धागा है?”

पत्नी बोली,” ठीक है। जाओ, नाप लो।“

व्यापारी ने खंभे के चारों ओर कच्चे रेशम को लपेटना शिरू कर दिया। इस बीच वह कई बार चोर के सामने से गुजरा जो खंभे से सटकर खड़ा था। धीरे-धीरे व्यापारी ने खंभे के इतने चक्कर लगाए कि चोर उसमें बंध गया।

व्यापारी की बात और कार्यकलाप से चोर की बुध्दि नष्ट हो गई थी। जब उसका विवेक लौटा तो उसने भागने की कोशिश की मगर उन कोमल धागों ने मिलकर इतना सुदृढ़ रूप धारण कर लिया था कि वह उनमें बंधकर रह गया। फिर व्यापारी ने चोर को कोतवाल के हवाले कर दिया। चोर समझ गया कि जब कच्चे धागे जुड़कर एक हो जाते हैं तो वे भी पक्के बन जाते हैं अर्थात एकता में बड़ा बल है।

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