आपके पर्स में रखा आईडी कार्ड नहीं है Valid ? जुर्म भी है ऐसे रखना

आपके पर्स में रखा आईडी कार्ड नहीं है Valid ? जुर्म भी है ऐसे रखना

नई दिल्ली: अक्सर लोग अपने पर्स में ड्राइविंग लाइसेंस, वोटर आईडी और पैन कार्ड की रंगीन फोटो कॉपी बनाकर उसे प्लास्टिक कार्ड बनाकर अपनी जेब में रखते है. ऐसा करने के पीछे लॉजिक ये होता है कि ओरिजनल डॉक्यूमेंट सेफ रहे.


लेकिन क्या आपको पता है कि ये कार्ड वैलिड तो नहीं है साथ ही ऐसा करना जुर्म भी है. क्योंकि ऐसा करना सरकारी दस्तावेज की मूल कॉपी के साथ छेड़खानी करना है. लेकिन 99 प्रतिशत लोग जानकारी के अभाव में ऐसा ही करते है. ट्रैफिक पुलिस के रोकने या पासपोर्ट दफ्तर में पासपोर्ट बनाते वक्त अक्सर लोग प्लास्टिक कार्ड से बने आईडी प्रूफ की ही कॉफी दिखाते है. लेकिन ये वैलिड नहीं है, जिससे कारण कई बार आवेदकों को परेशानी होती है.

सरकार ने डिजिटल लॉकर को खास मकसद से लॉन्च किया है. इसका मकसद भौतिक दस्तावेजों के उपयोग को कम करना और एजेंसियों के बीच में ई-दस्तावेजों के आदान-प्रदान को बढ़ावा देना है. डिजिटल लॉकर में अकाउंट बनाकर आप जन्म प्रमाण पत्र, पासपोर्ट, शैक्षणिक प्रमाण पत्र जैसे अहम दस्तावेजों को ऑनलाइन स्टोर कर सकते हैं. डिजिटल लॉकर में ई-साइन की सुविधा भी है जिसका उपयोग डिजिटल रूप से हस्ताक्षर करने के लिए किया जा सकता है.

सरकारी विभागों के साथ शेयर करें

आप डिजिटल लॉकर में जो भी कागजात अपलोड करते हैं उनके सामने शेयर का विकल्प दिया हुआ होगा. जैसे ही आप शेयर करें पर क्लिक करेंगे एक डायलॉग बॉक्स खुलेगा. उस डायलॉग बॉक्स में आप जिस भी व्यक्ति या संस्था से वह कागजात शेयर करना चाहते हैं उसका ईमेल आईडी डालेंगे और शेयर पर क्लिक करेंगे तो संबंधित मेल आईडी पर उस कागजात का लिंक मेल हो जाएगा. इसके बाद संबंधित एजेंसी या व्यक्ति उसका उपयोग कर सकता है.

इस फार्मेट में सेव होंगी फाइल

डिजिटल लॉकर में आप अपनी फाइल्स को pdf, jpg, jpeg, png, bmp और gif फॉरमेट में सेव कर सकते हैं. अपलोड की जाने वाली फाइल का साइज 1 एमबी से ज्यादा नहीं होना चाहिए. फिलहाल प्रत्येक यूजर को 10 एमबी का स्पेस मिलेगा जिसे बाद में बढ़ाकर 1 GB तक किया जाना प्रस्तावित है. इससे ऑनलाइन दस्तावेजों की प्रमाणिकता सुनिश्चित होगी.

डिजिटल लॉकर ही क्यों?

इस तरह की सुविधा के लिए डिजिटल लॉकर में सेव किए गए डॉक्यूमेंट्स को ही मान्यता दी गई है. इसका कारण ये है कि इसमें फर्जीवाड़े की कोई गुंजाइश नहीं है क्योंकि इस पर अकाउंट बनाने के लिए आपको आधार कार्ड की जरूरत होती है. इसके लिए एक बेहद आसान और साफ सुथरी प्रक्रिया है, जिससे ऑनलाइन दस्तावेजों की प्रामाणिकता सुनिश्चित होगी.

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