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धन का महत्व

17 hours ago vatan 0
जी का इकलौता पुत्र था-संदीप। वह बड़े लाड़-प्यार से पला था। संदीप जिस चीज की फरमाइश करता, वह पूरी हो जाती थी। इस प्रकार वह व्यर्थ में धन खर्च कराता रहता था। बड़े होने पर भी उसकी फिजूलखर्ची की आदत नहीं गई। उसके पिता सुरेश जी ने कई बार संदीप को समझाने की कोशिश की परंतु उसने फिजूल खर्च करना बंद नहीं किया। Read More

दंड या वरदान

19 hours ago vatan 0
एक दिन अयोध्या में मर्यादा पुरूषोत्तम राजसभा में बैठे थे। तभी उन्होंने व्दार पर एक दुखी फरियादी को देखा तो वहां कोई मनुष्य नहीं था। उन्होंने आकर श्रीराम को यह बात बात दी। श्रीराम ने लक्ष्मण को पुन: व्दार पर देखने के लिए भेजा। जब लक्ष्मण दूसरी बार दरवाजे पर गए तो उन्हें एक कुत्ता दिखाई दिया जो रो रहा था। वह श्रीराम के पास शिकायत लेकर आया था। लक्ष्मण उसे भीतर ले आए। Read More

उत्तराधिकारी

2 days ago vatan 0
                                       एक गुरू जी के दो शिष्य थे। वे हमेशा दोंनो को समान शिक्षा देते और कहते कि ईश्वर हर जगह उपस्थित है। इस प्रकार कई वर्ष गुजर एग। गुरूदेव ने दोनों शिष्यों को हर तरह का Read More

अनमोल खजाना

2 days ago vatan 0
एक बार एक महात्मा को मार्ग में पड़ा कुछ धन मिल गया। उन्होंने निश्चय किया कि वे यहधन सबसे निर्धन व्यक्ति को दान कर देंगे। फिर महात्मा जी सबसे निर्धन व्यक्ति कीतलाश में निकल पड़े। परंतु उन्हें कोई ऐसा सुपात्र व्यक्ति नहीं मिला जो अपनीआजीविका चलाने में सक्षम न हो इस प्रकार कई दिन बीत Read More

क्षमा

2 days ago vatan 0
पितामह का उपदेश सुनकर पराशर ने राक्षस-सत्र समाप्त कर दिया। उसी समय राक्षसों केकुलपुरूष महर्षि पुलस्त्य ने प्रकट होकर कहा,”पुत्र! क्षमा ग्रहण करके तुमने वैर को भुलादिया है। यह तुम्हारे कुल की मर्यादा के अनुरूप है। मैं आशीर्वाद देता हूं कि तुमशम्त्रों के ज्ञाता बनकर विष्णु पुराण की रचला करोगे।“ Read More

तीन डाकू

2 days ago vatan 0
काफी समय पहले की बात है। एक यात्री जंगल से गुजर रहा था तभी तीन डाकुओ ने उसे घेर लिया और उसका रुपया पैसा सब लूट लिया। एक डाकू बोला,”अब इस आदमी को जीवित छोड़ देने से क्या लाभ?”यह कहकर वह उस यात्री को मारने के लिए तलवार लेकर उस पर झपटा। तब दूसरे डाकू Read More

असंयम का फल

3 days ago vatan 0
बोधिसत्व का जन्म वाराणसी जिले में बंजारों के कुल में हुआ था। बंजारे माल-असबाब को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाने का काम करते थे। युवा बोधिसत्व को 500 गाड़ियों पर सामान लादकर ले जाना था और उन्हें बेचना था। अत: उन्होंने सामान लदवाकर अपने बंजारे साथियों से कहा,” मित्रो! हम जिस मार्ग से Read More

सोच में बदलाव

3 days ago vatan 0
दो मरीज अस्पताल के एक ही कमरे में अपने-अपने बिस्तरों पर लेटे थे। दोनों गंभीर रूप से बीमार थे ,और उन्हें ज्यादा मनोरंजन की अनुमति नहीं थी। वे बिस्तर से नहीं उठ सकते थे। एक मरीज को खिड़की के पास वाला बिस्तर मिला था। लेकिन उसे डाँक्टर का निदेंश था कि वह एक धंटे से Read More

महानता

3 days ago vatan 0
काफी समय पहले की बात है। उन दिनों चैतन्य महाप्रभु नवदीप में रहते थे। वे अपने सहपाठी मित्रों के साथ गुरूकुल में निवास करते थे। व्यकरण अध्ययन के बाद चैतन्य जी न्याय शास्त्र पर एक उत्कृष्ट और महान ग्रंथ लिख रहे थे जो अब अथक परिश्रम के फलस्वरूप था। चैतन्य जी के एक मित्र पंडित Read More

साहित्य में मन की दर्पण होते है ।

3 days ago vatan 0
💎 परमात्मा 💎 साहित्य में मन को दर्पण की उपमा दी जाती है और दर्पण का लक्षण होता है जो सामने हो उसका प्रतिबिंब दिखाना । 🍒 वर्षों से हम लोग मन रूपी दर्पण को लेकर सत्संग में बैठते हैं फिर भी ठाकुर जी का प्रतिबिंब दिखाई नहीं देता । दर्पण के अंदर तीन अवस्था Read More